बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता अपना चुनाव खुद नहीं जीत पाए, वे अब दूसरों को जिताने निकल पड़े हैं। गिरिराज सिंह ने इसे बिहार की एक कहावत से जोड़ते हुए कहा कि जैसे कहा जाता है कि “अपन ब्याह नहीं और सुरदास की बरतुहारी”, उसी तरह अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं है और दूसरे राज्यों में जाकर भूमिका निभाई जा रही है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
महागठबंधन पर ‘ठग बंधन’ का आरोप और महिला आरक्षण पर सवाल
केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी महागठबंधन पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने इसे “ठग बंधन” करार देते हुए कहा कि यह गठबंधन केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए बनाया गया है। गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी और ममता बनर्जी पर महिला आरक्षण बिल को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समय दोनों नेताओं की भूमिका सवालों के घेरे में रही थी, लेकिन अब वही नेता अलग-अलग मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं। उनके अनुसार यह विपक्ष की अंदरूनी अस्थिरता को दर्शाता है।

मोदी विरोध की राजनीति और विपक्ष की स्थिति पर कटाक्ष
गिरिराज सिंह ने कहा कि विपक्ष की राजनीति अब केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने तक सीमित रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में राहुल गांधी पहले ही राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुके हैं, जबकि ममता बनर्जी भी अपनी स्थिति को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। उनके अनुसार विपक्षी दलों के बीच कोई ठोस वैचारिक एकता नहीं है, बल्कि यह केवल सत्ता विरोधी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब इन राजनीतिक प्रयोगों को समझने लगी है और इसका असर आने वाले चुनावों में दिखाई देगा।
बंगाल राजनीति पर तीखा बयान और चुनावी रणनीति पर टिप्पणी
केंद्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की स्थिति अब मजबूत नहीं रह गई है और विपक्षी दल वहां केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने केजरीवाल को भी सलाह दी कि उन्हें उन राज्यों में जाकर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए जहां पहले से ही राजनीतिक समीकरण तय हो चुके हैं। गिरिराज सिंह ने दावा किया कि ऐसे दौरे विपक्षी दलों को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचाते हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनावों के संदर्भ में एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

