जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची जारी कर दी है। इस नई सूची में सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि राज्यसभा सांसद संजय झा को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार नीतीश कुमार स्वयं पार्टी अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि संगठनात्मक जिम्मेदारी संजय झा को सौंपी गई है। इस बदलाव को पार्टी संगठन में संतुलन और अनुभव के आधार पर लिया गया निर्णय माना जा रहा है।
12 नेताओं को महासचिव की जिम्मेदारी, कई वरिष्ठ चेहरों को अहम भूमिका
नई सूची में पार्टी ने 12 नेताओं को महासचिव की जिम्मेदारी दी है। इनमें मनीष कुमार वर्मा, आफाक अहमद खान, श्याम रजक, अशोक चौधरी, रमेश सिंह कुशवाहा, रामसेवक सिंह, कहकशां प्रवीण, कपिल हरिशचंद्र पाटील, राज सिंह मान, इंजीनियर सुनील कुमार, हर्षवर्धन सिंह और मौलाना गुलाम रसूल बलियावी के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राजीव रंजन प्रसाद को सचिव और प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं गोपालगंज से सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जिससे संगठन में नई कार्यप्रणाली और वित्तीय जिम्मेदारियों को मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद में बड़ी कटौती, अब सिर्फ एक उपाध्यक्ष
इस नई सूची में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव यह भी देखने को मिला है कि पार्टी में पहले जहां तीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होते थे, अब केवल एक ही उपाध्यक्ष रखा गया है। जहानाबाद के पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को यह जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पहले उपाध्यक्ष रहे भगवान सिंह कुशवाहा को इस बार महासचिव बनाया गया है। संगठन में इस बदलाव को पार्टी के भीतर नई रणनीति और संरचना के रूप में देखा जा रहा है, जिससे निर्णय प्रक्रिया को अधिक केंद्रीकृत करने की कोशिश की गई है।
निशांत कुमार का नाम सूची से गायब, राजनीतिक चर्चाएं तेज
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। हाल ही में उनके राजनीति में आने की अटकलें तेज थीं, लेकिन नई कार्यकारिणी सूची में उन्हें कोई पद नहीं दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, कुछ नेताओं को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में स्थान मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। संगठनात्मक बदलावों के बीच यह साफ है कि जेडीयू ने फिलहाल अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी नई टीम तैयार की है।

