कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर नशीले पदार्थ और सिम कार्ड पहुंचाने का मामला सामने आया है। यह घटना 26 मार्च की शाम की बताई जा रही है, जब एक युवती जेल में मिलने के लिए पहुंची थी। जेल प्रशासन और औद्योगिक सुरक्षा बल (ISF) की सतर्कता के चलते इस प्रयास को समय रहते नाकाम कर दिया गया। जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर महिला को रोका गया और उसकी गहन तलाशी ली गई, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इस घटना ने जेल सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
युवती की पहचान और जेल में प्रवेश का पूरा घटनाक्रम
गिरफ्तार युवती की पहचान रितिका राय (27) के रूप में हुई है, जो जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी फरां खान से मिलने आई थी। जानकारी के अनुसार, रितिका ने मुलाकात के लिए पास प्राप्त किया था और निर्धारित समय शाम 4:30 बजे जेल परिसर में प्रवेश किया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन मुख्य द्वार के पास उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। वहां मौजूद ISF जवानों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए महिला सुरक्षाकर्मियों को सूचना दी और उसके बैग तथा सामान की गहन जांच कराने का निर्णय लिया। इसी सतर्कता के चलते पूरा मामला सामने आया और एक संभावित बड़ी गड़बड़ी टल गई।

तलाशी में बरामद हुआ नशीला सामान और सिम कार्ड
महिला सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई तलाशी में रितिका राय के पास से कई अवैध वस्तुएं बरामद हुईं, जिससे सभी चौंक गए। उसके पास से 3 एयरटेल सिम कार्ड, लगभग 30 ग्राम गांजा, बीड़ी और करीब 30 ग्राम अन्य नशीले पदार्थ मिले। यह साफ संकेत था कि वह जेल के अंदर अवैध रूप से नशीला सामान और संचार साधन पहुंचाने की कोशिश कर रही थी। सामान बरामद होते ही जेल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया और बाद में परप्पना अग्रहारा पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और आरोपों के आधार पर केस दर्ज किया गया है।
कानूनी कार्रवाई और प्रशासन की सख्ती
पुलिस ने रितिका राय के खिलाफ नशीले पदार्थ अधिनियम और जेल नियमों के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने के संकेत दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। वहीं, बेंगलुरु में ही एक अन्य मामले में यातायात पुलिस विभाग ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इन पर ड्यूटी के दौरान बॉडी-वर्न कैमरा बंद रखने और वाहन चालकों से अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इन दोनों घटनाओं ने प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा को जन्म दिया है।

