ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं बल्कि अन्य गैजेट्स भी खरीदे और बेचे जाते हैं। इनमें स्मार्टवॉच, एयरपॉड्स, SSD, ड्रोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। पुराने होने के कारण ये गैजेट्स नई चीजों की तुलना में काफी सस्ते मिलते हैं। हालांकि, सस्ते होने का मतलब यह नहीं कि इन्हें बिना जांचे खरीदना सुरक्षित है। कई मामलों में पुराना गैजेट समय के साथ अपनी परफॉर्मेंस खो चुका होता है और इसकी मरम्मत या बैटरी बदलने पर अतिरिक्त खर्च भी आ सकता है। इसलिए खरीदने से पहले सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।
स्मार्टवॉच और इन-ईयर हेडफोन: बैटरी और हाइजिन की चुनौती
अगर आपको स्मार्टवॉच की जरूरत है तो हमेशा नई खरीदना बेहतर रहेगा। पुरानी स्मार्टवॉच में सबसे बड़ा इश्यू बैटरी का होता है। बार-बार चार्ज होने के कारण बैटरी अपनी क्षमता खो देती है और जल्दी खत्म होने लगती है। ऐसे में बैटरी रिप्लेसमेंट पर भी आपको खर्च करना पड़ सकता है। इसी तरह इन-ईयर हेडफोन और एयरपॉड्स को भी पुराना खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। इनमें हाइजिन सबसे बड़ी चिंता है। चाहे आप सिलिकॉन ईयर टिप बदल लें, बड्स के अंदर का पूर्ण सफाई करना संभव नहीं होता। इसके अलावा पुराने हेडफोन और एयरपॉड्स की बैटरी भी जल्दी खत्म होने लगती है।

पुरानी SSDs और ड्रोन: डेटा और उड़ान में खतरे
पुरानी SSDs (सॉलिड-स्टेट ड्राइव्स) भी खरीदने में जोखिम भरी होती हैं। ये हार्ड ड्राइव की तुलना में फास्ट और कॉम्पैक्ट होती हैं, लेकिन डेटा लिखने के साथ उनकी मेमोरी सेल्स डीग्रेड होने लगती हैं। इससे SSD जल्दी अपनी लिमिट तक पहुँच जाती है और डेटा खोने का खतरा रहता है। ड्रोन खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। ड्रोन के साथ क्रैश होने की संभावना अधिक होती है और इसका पता केवल देखने से नहीं चलता कि वह कितनी बार गिर चुका है। इसके अलावा ड्रोन की बैटरी को बदलना आसान है, लेकिन यदि बैटरी ज्यादा समय तक इस्तेमाल हो चुकी हो तो आपको पुराना ड्रोन खरीदकर भी नई बैटरियों पर खर्च करना पड़ेगा।
पुराना खरीदने से पहले जांच और सावधानी
पुराने गैजेट खरीदने से पहले इसकी पूरी जांच करना जरूरी है। बैटरी, फंक्शनलिटी, मेमोरी स्टेट और शारीरिक नुकसान की स्थिति को जांचें। ऑनलाइन खरीदारी करते समय रेटिंग और विक्रेता की विश्वसनीयता पर ध्यान दें। ऑफलाइन खरीद में फोन या गैजेट को हाथ में लेकर चलाएं और सभी फीचर्स चेक करें। कई बार पुराना गैजेट सस्ता जरूर लगता है, लेकिन रिपेयर या बैटरी बदलने पर खर्च बढ़ जाता है। इसलिए निर्णय लेने से पहले फायदा और जोखिम का संतुलन समझना जरूरी है।

