मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अभिनेता से नेता बने विजय की याचिका को खारिज कर दिया। विजय ने 1.5 करोड़ रुपये के इनकम टैक्स जुर्माने को चुनौती दी थी, जो वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए कथित 15 करोड़ रुपये की अघोषित आय के मामले में लगाया गया था। इस फैसले की घोषणा सिंगल जज जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने 23 जनवरी 2026 को सुरक्षित रखने के बाद की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स विभाग द्वारा जारी शो कॉज नोटिस पूरी प्रक्रिया के अनुसार और समय सीमा के भीतर जारी किया गया था, इसलिए इसे खारिज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का तर्क और नोटिस की वैधता पर जोर
हाई कोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी करने में कोई कानूनी कमी नहीं पाई गई है। कोर्ट ने इस वजह से मामले के अन्य पहलुओं जैसे पेनल्टी के उचित होने या न होने पर विचार नहीं किया। हालांकि, कोर्ट ने विजय को यह अधिकार दिया कि वे लिमिटेशन (समय सीमा) से अलग किसी भी अन्य आधार पर इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के समक्ष इस नोटिस और आदेश को चुनौती दे सकते हैं। यह फैसला एक प्रकार से विजय के लिए उम्मीद की किरण है कि वह न्यायालयीन प्रक्रिया का फायदा उठाकर आगे भी लड़ सकते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि: सर्च से पेनल्टी तक का लंबा संघर्ष
यह विवाद सितंबर 2015 में विजय के घर पर हुई इनकम टैक्स जांच से शुरू हुआ था। जांच के बाद दिसंबर 2017 में एक असेसमेंट ऑर्डर पारित किया गया। इसके बाद दिसंबर 2018 में धारा 271AAB(1) के तहत पेनल्टी लगाई जाने लगी। विजय ने इस पेनल्टी को इनकम टैक्स कमिश्नर के समक्ष चुनौती दी, जहां उनका कुछ हिस्सा स्वीकार किया गया। डिपार्टमेंट ने मामला ITAT में ले जाकर उसे चुनौती दी, जहां विजय को कुछ राहत मिली, खासतौर पर उनके फैन एसोसिएशन से जुड़े खर्चों को शामिल करते हुए। लेकिन, पेनल्टी की प्रक्रिया चलती रही और जुलाई 2019 में विभाग ने धारा 263 के तहत सुधार नोटिस जारी किया, जो मई 2022 में ITAT ने खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट का मुख्य फोकस और आगे की संभावनाएं
मुकदमे का मुख्य मुद्दा था कि क्या पेनल्टी का अंतिम आदेश धारा 275 के तहत तय समय सीमा के भीतर पारित हुआ था या नहीं। एक अंतरिम फैसले में हाई कोर्ट की दूसरी बेंच ने पाया कि आदेश समय सीमा के बाहर था और इसलिए पेनल्टी वसूली पर रोक लगा दी गई। लेकिन अंतिम फैसले में कोर्ट ने नोटिस को वैध माना और विजय की याचिका खारिज कर दी। अब विजय के लिए रास्ता खुला है कि वे अन्य आधारों पर ITAT में अपनी चुनौती जारी रखें। यह मामला केवल एक व्यक्तिगत वित्तीय विवाद नहीं, बल्कि कानून के तकनीकी पहलुओं और न्यायिक प्रक्रियाओं की सीमाओं को भी दर्शाता है। अब देखना होगा कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और न्यायिक प्रक्रिया का अंत कैसे होता है।

