Red Fort blast Case: सुरक्षा एजेंसियों की जांच में लाल किला ब्लास्ट मामले का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विस्फोटक बनाने में नेल पॉलिश रिमूवर के रूप में इस्तेमाल होने वाला एसीटोन और पिसी हुई चीनी का इस्तेमाल किया गया था। फरीदाबाद से बरामद यह विस्फोटक इस मामले का मास्टरमाइंड डॉक्टर उमर मोहम्मद था, जिसकी पहले ही मौत हो चुकी है। जांच में पता चला कि डॉक्टर उमर जैश-ए-मोहम्मद का प्रशिक्षित आतंकी था जिसने देश में सबसे बड़े आतंकी हमलों की साजिश रची थी। उसकी मौत के बाद भी उसकी योजना और आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है।
डॉक्टर उमर की पहचान और आतंकी गतिविधियां
पकड़े गए आतंकी मुजम्मिल के बयान के अनुसार, डॉक्टर उमर खुद को ‘आमिर’ यानी राजकुमार या सेनापति कहता था। उमर बेहद पढ़ा-लिखा था और नौ से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान रखता था, जिनमें हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, पर्सियन, अरबी, चीनी और फ्रेंच शामिल थीं। उमर अपने आप को एक शासक और लीडर मानता था और अपने साथियों को काबू में रखता था। उसने कहा था कि देश का माहौल खराब है और पोलराइजेशन बढ़ रहा है, इसलिए उन्हें आतंक फैलाने के लिए तैयार रहना चाहिए। उसकी ये सोच जुलाई 2023 की मेवात हिंसा और मार्च 2023 के भिवानी हत्याकांड से प्रेरित थी।

आतंक की साजिश और विस्फोटक निर्माण की योजना
जांच में यह भी सामने आया कि उमर और उसके साथियों ने नूंह मेवात से यूरिया और फर्टिलाइजर खरीदकर अल फलाह यूनिवर्सिटी में विस्फोटक बनाने की प्रयोगशाला बनाई थी। उमर खुद अपने कमरे में विस्फोटक का परीक्षण करता था। समूह में उमर के अलावा डॉक्टर अदील, डॉक्टर शाहीन, मुफ्ती इरफान और मुजम्मिल शामिल थे। उन्होंने छह महीने में चीनी भाषा सीखकर एक चीनी भाषा आधारित ग्रुप बनाया था, जहां सिर्फ चीनी भाषा में बातें होती थीं। इस समूह का उद्देश्य भारत में बड़ी आतंकी गतिविधि को अंजाम देना था।
डॉक्टर उमर और उसका आतंकी नेटवर्क
मुजम्मिल के अनुसार उमर और अदील पहले से परिचित थे, जबकि मुजम्मिल डॉक्टर शाहीन से प्यार करता था। उमर लगातार बाबरी मस्जिद विवाद और भारत में मुसलमानों पर कथित अत्याचारों की कहानियां सुनाता था और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के खिलाफ नफरत फैला रहा था। उमर का मानना था कि भारतीय सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर में गैरकानूनी तरीके से काम कर रहे हैं और उन्हें रोका जाना चाहिए। उसने खुद को हमेशा ‘ईमिर’ बताया और अपने साथियों को धार्मिक लड़ाई के लिए प्रेरित किया।
आतंक फैलाने की योजना का पर्दाफाश और गिरफ्तारी
मुजम्मिल ने बताया कि वे फरीदाबाद से जम्मू-कश्मीर आतंकवादी अभियान के लिए विस्फोटक ले जाने वाले थे, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण उनकी योजना नाकाम हो गई। अक्टूबर 2023 में सुरक्षा बलों ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया जिनके बयान से मुफ्ती इरफान तक पहुंच हुई और वह पकड़ा गया। इसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में गहनता से जांच कर रही हैं ताकि देश में आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सके और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

