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Saturday, November 29, 2025
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पाकिस्तान का व्यापार घाटा 3.34 अरब डॉलर पर पहुंचा, बढ़ती आयात और घटती निर्यात ने बढ़ाई आर्थिक चिंता

पाकिस्तान, जो पहले ही गंभीर नकदी संकट का सामना कर रहा है, सितंबर 2025 में अपने व्यापार घाटे में बढ़ोतरी देख रहा है। पाकिस्तान का व्यापार घाटा 3.34 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। बढ़ती आयात लागत और घटती निर्यात की वजह से देश की बाहरी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

आयात में वृद्धि और निर्यात में गिरावट

पाकिस्तान के व्यापार घाटे में इस बढ़ोतरी के मुख्य कारण आयात में 14 प्रतिशत की वृद्धि और निर्यात में 11.7 प्रतिशत की गिरावट हैं। सितंबर 2024 में पाकिस्तान का व्यापार घाटा 2.29 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 3.34 बिलियन डॉलर हो गया है। यह घाटा अगस्त 2025 की तुलना में 16.3 प्रतिशत अधिक है। आयात में तेजी और निर्यात में गिरावट ने देश की आर्थिक नाजुकता को और बढ़ा दिया है।

पाकिस्तान का व्यापार घाटा 3.34 अरब डॉलर पर पहुंचा, बढ़ती आयात और घटती निर्यात ने बढ़ाई आर्थिक चिंता

त्रैमासिक आंकड़े और व्यापक प्रभाव

वर्तमान वित्तीय वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में पाकिस्तान का व्यापार घाटा 32.9 प्रतिशत बढ़कर 9.37 बिलियन डॉलर हो गया। इसी अवधि में आयात 13.5 प्रतिशत बढ़कर 16.97 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 3.8 प्रतिशत घटकर 7.6 बिलियन डॉलर रह गया। इस घाटे ने पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाया है और देश की मुद्रा स्थिरता के लिए खतरा पैदा किया है।

मुद्रा और ऋण संकट की आशंका

आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ता व्यापार घाटा पाकिस्तानी रुपये की अस्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सकता है। इसके अलावा, देश के लिए ऋण चुकाने की स्थिति और जटिल हो सकती है। पाकिस्तान लगभग 250 मिलियन की आबादी वाला देश विदेशी ऋण पर निर्भर है और अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, IMF, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से फंड पर भरोसा करता है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव और भविष्य की चुनौतियाँ

बढ़ता व्यापार घाटा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर लंबी अवधि में गंभीर दबाव डाल सकता है। बढ़ती आयात लागत और घटती निर्यात क्षमता देश को वित्तीय संकट की ओर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार करना होगा और निर्यात बढ़ाने तथा आयात नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। नहीं तो मुद्रा अस्थिरता और ऋण संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

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