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Saturday, November 29, 2025
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ED ने Flipkart को दिया बड़ा ऑफर, गुनाह कबूल करो और जुर्माना भरो वरना होगी कड़ी कार्रवाई

एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart को एफईएमए उल्लंघन मामले में मुआवजे का विकल्प दिया है। सूत्रों के अनुसार, फ्लिपकार्ट को इस मामले में अपराध स्वीकार करना होगा और जुर्माना अदा करना होगा। पिछले सप्ताह ED ने फ्लिपकार्ट को एफईएमए के कंपाउंडिंग नियमों के तहत यह विकल्प पेश किया। इसके तहत फ्लिपकार्ट को जुर्माना भरने और अपने संबंधित विक्रेता नेटवर्क को समाप्त करने की शर्त रखी गई है।

Amazon India की जांच

इस मामले में ED ने Amazon India को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समन भेजा। जब Amazon India से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “हम चल रही जांच पर टिप्पणी नहीं करते।” वहीं, ED से संपर्क करने पर भी कोई उत्तर नहीं मिला। ई-कॉमर्स क्षेत्र के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कंपाउंडिंग विकल्प से भारत को अमेरिका के साथ चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में लाभ हो सकता है।

ED ने Flipkart को दिया बड़ा ऑफर, गुनाह कबूल करो और जुर्माना भरो वरना होगी कड़ी कार्रवाई

आरोप क्या हैं

फ्लिपकार्ट और Amazon India पर एफईएमए प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप है। आरोप है कि ये कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर बिक्री बढ़ाने के लिए विशेष छूट दे रही हैं। एफईएमए के कंपाउंडिंग नियम के तहत कंपनियां स्वयं उल्लंघनों को स्वीकार कर जुर्माना अदा कर सकती हैं। इससे लंबी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है और मामला शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ सकता है।

फ्लिपकार्ट का स्वामित्व

यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिकी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने 2018 में भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण किया था। इस अधिग्रहण के बाद फ्लिपकार्ट ने भारत में अपनी बिक्री और विस्तार को तेजी से बढ़ाया। एफईएमए उल्लंघनों के आरोपों का संबंध भी इसी विस्तार और विदेशी निवेश के साथ जोड़ा जा रहा है। कंपनी के लिए यह मामला केवल कानूनी चुनौती नहीं बल्कि प्रतिष्ठा का भी मसला बन गया है।

भविष्य की राह और संभावित समाधान

कंपाउंडिंग विकल्प से फ्लिपकार्ट मामले को जल्दी और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा सकती है। जुर्माना अदा करने और नेटवर्क को बदलने के बाद कंपनी कानूनी प्रक्रियाओं से मुक्त हो सकती है। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। यह मामला दर्शाता है कि विदेशी निवेश और ई-कॉमर्स कंपनियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी जारी है और नियमों का पालन अनिवार्य है।

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